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नमामि गंगे मिशन में किन राज्यों ने मारी बाजी जाने पूरी खबर

नमामि गंगे मिशन में इन राज्यों ने मारी बाजी

सार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए 11 परियोजना स्वीकृत की गई थी, इनमें से इस साल के प्रारंभ तक कोई भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी। वहीं बिहार के लिए स्वीकृत 47 परियोजनाओं में से केवल छह ही पूरी हो सकी हैं…

गंगा नदी के पुनरुद्धार के लिए मोदी सरकार की तरफ से शुरू की गई नमामि गंगे परियोजना के तहत हो रहे कार्यों में दिल्ली और बिहार पिछड़ गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए 11 परियोजना स्वीकृत की गई थी, इनमें से इस साल के प्रारंभ तक कोई भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी।
वहीं बिहार के लिए स्वीकृत 47 परियोजनाओं में से केवल छह ही पूरी हो सकी हैं। दूसरी ओर उत्तराखंड की 49 परियोजनाओं में से 34 पर काम पूरा कर लिया गया है।

हरियाणा के हिस्से केवल दो परियोजनाएं आई थीं, जिनमें से दोनों ही पूरी हो चुकी हैं।
बता दें कि केंद्र सरकार की इस योजना पर 2014 में काम शुरू हुआ था। इसके तहत गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने तथा गंगा नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कई कार्यों की शुरुआत की गई थी। नमामि गंगे के फ्लैगशिप कार्यक्रम के तहत आठ राज्यों उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में विभिन्न गतिविधियां चालू की गई थीं। इनमें मुख्य तौर पर सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, नदी तट विकास, नदी सतह सफाई, घाट एवं शवदाह गृह, सांस्थानिक विकास, जैविक विविधीकरण संरक्षण, वन रोपण एवं ग्रामीण जल निकास प्रणाली के लिए 28790.66 करोड़ रुपये की लागत वाली 310 परियोजनाएं स्वीकृत की गई थी।
इनमें से इस साल के शुरू में करीब 116 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। खास बात है कि उत्तराखंड में घाट और शवदाह गृह परियोजनाओं की संख्या 10 थी, जिनके लिए 192.06 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई थी। इनमें से 177.18 करोड़ रुपये खर्च कर नौ परियोजनाएं पूरी कर ली गईं।

सीवेज अवसंरचना की 34 परियोजनाओं में से 23 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। वन रोपण की चार परियोजनाओं में से दो पूरी कर ली गई हैं। उत्तर प्रदेश में सीवेज अवसंरचना की 50 में से 16 परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं। घाट और शवदाह गृह की 15 में से 11 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं।

झारखंड में घाट एवं शवदाह गृह की चार में से तीन परियोजना पूरी हो गई हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में 29 में से 24 परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं। वन रोपण में झारखंड, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल व बिहार की चार-चार परियोजनाओं में से हर राज्य ने दो परियोजनाएं पूरी कर ली हैं।

अगर उत्तरप्रदेश की बात करें, तो वहां के लिए स्वीकृत पांच में से दो परियोजनाओं पर काम पूरा हो चुका है। घाटों की सफाई के लिए उत्तराखंड में एक परियोजना थी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। उत्तर प्रदेश में ये दो परियोजनाएं थीं, इनमें से कोई भी पूरी नहीं हो सकी।

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