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कश्मीर में भाजपा पर आतंकी हमले का खौफ,अब तक बीजेपी के 40 नेता दे चुके हैं इस्तीफा

कश्मीर में पिछले एक सप्ताह में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलाकर 40 इस्तीफे हो चुके हैं.

  • कश्मीर में आतंकियों के निशाने पर हैं बीजेपी नेता
  • बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बना चुके आतंकी
  • कश्मीर में 1267 पंच और सरपंच हैं और ज्यादातर भाजपा से जुड़े हुए हैं, क्योंकि जब पिछले साल अक्टूबर में चुनाव हुए तो नेशनल कांफ्रेंस-पीडीपी के लोग नजरबंद थे

जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता लगातार इस्तीफा दे रहे हैं. मध्य कश्मीर के गांदरेबल जिले से बीजेपी के छह सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही कश्मीर में पिछले एक सप्ताह में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलाकर 40 इस्तीफे हो चुके हैं.

कश्मीर में सरपंचों और पंचायत सदस्यों सहित पार्टी नेताओं पर हाल के दिनों हुए हमलों के बाद बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता भयभीत हैं. पिछले महीने 8 जुलाई को आतंकवादियों ने बीजेपी के वसीम बारी, उनके भाई उमर शेख और पिता बशीर शेख की बांदीपोरा में गोली मारकर हत्या कर दी थी.

बांदीपोरा की घटना के एक महीने बाद 9 अगस्त को दहशतगर्दों ने ओमपारा, बडगाम में बीजेपी कार्यकर्ता हामिद जमाल नाजर को गोली मार दी थी. वहीं 6 अगस्त को दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड इलाके में सरपंच सज्जाद खांडे की उनके आवास के बाहर हत्या कर दी गई थी. 4 अगस्त को एक अन्य बीजेपी सरपंच आरिफ अहमद शाह कुलगाम जिले में आतंकियों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

इन हमलों के डर से घाटी में भाजपा से जुड़े 40 लोगों ने इस्तीफा देने और राजनीति छोड़ने का ऐलान किया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में रहने वाले सरपंच मुहम्मद इकबाल कहते हैं कि वो मरना नहीं चाहते। बोले, ‘मेरी पत्नी की मौत हो चुकी है। अब अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे बच्चों का कौन ख्याल रखेगा?’ इकबाल कहते हैं कि मैंने राजनीति से एक पैसा भी नहीं कमाया है। मैं अपना वक्त अपने काम में लगाना चाहता हूं। इकबाल ने कुछ दिन पहले वीडियो मैसेज के जरिए इस बात की जानकारी दी थी।

दूसरी तरफ भाजपा इन इस्तीफों को मौका परस्ती बता रही है। पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर कह चुके हैं कि जो लोग इस्तीफा दे रहे हैं, वे सिर्फ अपना फायदा देख रहे हैं। ये लोग अपने फायदे के लिए दल बदलते रहते हैं, इनके लिए देशहित की कोई वैल्यू नहीं है।उधर प्रशासन पंचायत से जुड़े सदस्यों की सुरक्षा के इंतजाम का दावा तो कर रहा है, लेकिन ज्यादातर सदस्य, इससे संतुष्ट नहीं है। इन सदस्यों में ज्यादातर भाजपा के हैं। प्रशासन इन्हें अलग-अलग सुरक्षित जगहों पर ले जा रहा है, भले ही वहां जाने की मर्जी सदस्यों की नहीं हो।

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