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स्वास्थ्य मंत्रालय की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत दिए गए रिकॉर्ड 2 लाख टेली परामर्श

स्वास्थ्य मंत्रालय की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत दिए गए रिकॉर्ड 2 लाख टेली परामर्श

डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि, स्वास्थ्य मंत्रालय की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत रिकॉर्ड 2 लाख टेली परामर्श.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की डिजिटल सेवा ई-संजीवनी के तहत अब तक 2 लाख टेली परामर्श दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘डिजिटल इंडिया’ पहल की दिशा में यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। ई-संजीवनी ने चिकित्सा समुदाय, सेवा प्रदाताओं और कोविड काल में जरूरतमंद स्वास्थ्य रक्षा सेवा चाहने वालों के लिए अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है। ई-संजीवनी के तहत दो प्रकार की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें डॉक्टर-टू-डॉक्टर (ई-संजीवनी) और मरीज-टू-डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी) टेली परामर्श शामिल हैं।

इनमें से डॉक्टर-टू-डॉक्टर सेवा आयुष्मान भारत और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एबी-एचडब्ल्यूसी) के तहत कार्यान्वित की जाती है, जिसका उद्देश्य ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत चिन्हित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के तालमेल के साथ सभी 1.5 लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में टेली परामर्श सेवाएं लागू करना है। राज्यों ने मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में समर्पित ‘हब’ की पहचान की है, जो एसएचसी, पीएचसी और एचडब्ल्यूसी टेली परामर्श ‘स्पोक’ कराते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की दूसरी टेली परामर्श सेवा ‘ई-संजीवनी ओपीडी’ कोविड-19 महामारी के दौरान अप्रैल, 2020 में मरीज-टू-डॉक्टर टेली परामर्श की सुविधा शुरू की गई थी। इस सुविधा ने कोविड की रोकथाम के साथ-साथ गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य रक्षा सेवाओं में भी अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। ई-संजीवनी को अभी तक 23 राज्यों में लागू किया गया है और अन्य राज्यों में भी यह शुरू होने की प्रक्रिया में है।

ई-स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करने वाले पांच  शीर्ष राज्यों में तमिलनाडु (56,346 टेली परामर्श), उत्तर प्रदेश (33,325), आंध्र प्रदेश (29,400), हिमाचल प्रदेश (26,535) और केरल (21,433) परामर्श शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में एचडब्ल्यूसी-मेडिकल कॉलेज के माध्यम से 25,478 परामर्श हुए, जबकि तमिलनाडु ओपीडी सेवाओं में 56,346 परामर्श सेवाओं के साथ सबसे आगे रहा।

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