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राजस्थान का सियासी संकट खत्म सीएम गहलोत ने अमित शाह के लिए क्या कहा जाने पूरी खबर

राजस्थान का सियासी संकट खत्म

राजस्थान की कांग्रेस सरकार का सियासी संकट शुक्रवार को खत्म हो गया। गहलोत सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास मत ध्वनि मत से जीत लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा में कहा, ‘भाजपा और उनके हाईकमान ने सरकार गिराने की कोशिश की थी, लेकिन राजस्थान में सियासी घटनाक्रम का जिस तरह अंत हुआ, उससे अमित शाह को धक्का लगा।’

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज बीजेपी के लोग बगुला भगत बन रहे हैं। सौ—सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। मैं 69 साल का हो गया, 50 साल से राजनीति में हूं। मैं आज लोकतंत्र को लेकर चिंतित हूं। मैं सम्माननीय नेता प्रतिपक्ष को कहना चाहूंगा कि आप चाहे कितनी भी कोशिश कर लो, मैं आपको कहता हूं कि मैं राजस्थान की सरकार को गिरने नहीं दूंगा।

गहलोत ने ट्वीट कर कहा, विधानसभा में विश्वास मत जीतना उन ताकतों के लिए एक संदेश है जो देश में निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी हर रणनीति राजस्थान में विफल रही। यह लोगों की हमारे प्रति अटूट आस्था और हमारे कांग्रेस विधायकों की एकता है, जिसने यह जीत दिलाई है।

विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। कांग्रेस के चीफ व्हिप महेश जोशी ने स्पीकर सीपी जोशी के सामने विश्वास मत प्रस्ताव का नोटिस रखा। कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विश्वास मत प्रस्ताव रखा और इस पर बहस शुरू हो गई। करीब 3 घंटे चली बहस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जवाब के बाद पूरी हुई और विश्वास मत प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही अगले शुक्रवार यानी 21 अगस्त तक स्थगित कर दी गई।

बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा, ‘राजस्थान में न तो किसी शाह की चली, न तानाशाह की। भाजपा कहती है कि कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ेबंदी की, अगर ये बाड़ेबंदी है तो आपने जो विधायक गुजरात भेजे थे, वे क्या रासलीला रचाने के लिए गए थे? महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने आधी रात राष्ट्रपति को जगा दिया। जिस दिन फडणवीस की सरकार गिरी, उस दिन मोटा भाई और छोटा भाई को इस्तीफा दे देना चाहिए था।’ इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया बोले, हॉर्स ट्रेडिंग की बात करते हो, आप तो बसपा के पूरे के पूरे हाथी गटक गए।’

बहस के बीच प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ बार-बार सचिन पायलट का नाम ले रहे थे। इस पर पायलट बीच में खड़े होकर स्पीकर से बोले, ‘आपने मेरी सीट में बदलाव किया। मैंने सोचा- मेरी सीट यहां क्यों रखी है? मैंने देखा कि यह सरहद है, जहां एक तरफ सत्ता पक्ष और दूसरी ओर विपक्ष। सरहद पर उसे भेजा जाता है, जो सबसे मजबूत होता है।’

पायलट ने कहा, ‘समय के साथ सभी बातों का खुलासा होगा। जो कुछ कहना-सुनना था, वह कह दिया। हमें जिस डॉक्टर के पास अपना मर्ज बताना था बता दिया। सदन में आए हैं तो कहने-सुनने की बातों को छोड़ना होगा। इस सरहद पर कितनी भी गोलीबारी हो, ढाल बनकर रहूंगा।’

दरअसल, सदन की बैठक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। डिप्टी सीएम के पद से हटाए जाने के बाद सचिन पायलट अब अशोक गहलोत के बगल वाली सीट पर नहीं बल्कि दूसरी लाइन में बैठे। पायलट के साथ ही पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा की सीट भी बदली है। विश्वेंद्र को आखिरी लाइन में 14 नंबर सीट और मीणा के लिए पांचवीं लाइन में 54 नंबर की सीट दी गई है

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