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नेपाल के प्रधानमंत्री ओली का बड़ा आरोप, कहा- भारत रच रहा है सरकार गिराने की साजिश

केपी ओली शर्मा ने कहा कि पिछली बार भी जब वे पीएम थे तब चीन के साथ व्यापार और पारगमन समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें हटा दिया गया था.

  • नेपाल के पीएम ने भारत पर अपनी सरकार गिराने का लगाया गंभीर आरोप
  • कहा- मेरी सरकार गिरी, तो नेपाल के पक्ष में बोलने की हिम्मत कोई नहीं करेगा

 

नई दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आरोप लगाया है कि भारत ने उन्हें पद से हटाने की साजिश की है, क्योंकि उन्होंने नेपाल का नया नक्शा जारी किया है जिसमें लिंपियाधुरा, महाकाली और लिपुलेख शामिल हैं. उन्होंने नेपाल के नेताओं पर भी इसमें शामिल होने का आरोप लगाया.

केपी शर्मा ओली ने कहा “हमने नक्शा सही किया है. हमने इसे संवैधानिक रूप दिया. उसके बाद आपने सुना होगा कि प्रधानमंत्री सप्ताह या 15 दिन में बदल रहे हैं. आपने भारतीय मीडिया और बुद्धिजीवियों के बारे में सुना होगा.’’ प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का राज्य तंत्र आश्चर्यजनक रूप से सक्रिय है.” दूतावास में सक्रियता बढ़ी है.

 

ओली ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले जब उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में चीन के साथ ट्रेड‌ एंड ट्रांजिट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, तो उनकी सरकार गिरा दी गई थी, लेकिन अब हमारे पास बहुमत है. बता दें कि उस समय भी केपी ओली का गठबंधन ‌प्रचंड के साथ था और प्रचंड ने अपना समर्थन वापस ले लिया था, इसलिए उनकी सरकार गिर गई थी.

 

नेपाल के जननेता मदन भंडारी की 69वीं जयंती के अवसर पर ओली ने अपने संबोधन में कहा कि बहुत से नेपाल के नेताओं ने मुझसे कहा कि अपनी जमीन को समेटते हुए जो नक्शा छापा है वह बहुत बड़ी भूल है, ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मैंने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो.

 

केपी शर्मा ओली ने कहा कि भले ही उन्हें पद से हटाने का खेल शुरू हो लेकिन यह असंभव है. प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया था कि काठमांडू के एक होटल में उन्हें हटाने के लिए बैठकें की जा रही है और इसमें एक दूतावास भी सक्रिय है. बता दें कि ओली का इशारा भारत की तरफ है.

 

 

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल द्वारा नया नक्शा प्रकाशित किए जाने के बाद, कुछ लोगों ने कहा कि कोई वापसी की बात नहीं थी. उन्होंने कहा, “वापसी का कोई मतलब नहीं था. हमें हमारी जमीन चाहिए.’’ फिलहाल अभी तक नेपाल के प्रधानमंत्री के आरोप पर भारत सरकार कि तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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