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जानें पांच खास बातें उस उज्जैन शहर की, जहां से विकास दुबे गिरफ्तार हुआ

कानपुर का गैंगस्टर विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में गिरफ्तार किया गया है

कानपुर का गैंगस्टर विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में गिरफ्तार किया गया है. ये बड़ा सवाल जरूर है कि वो छिपने के लिए उज्जैन ही क्यों गया था. कैसा शहर है उज्जैन. जानते हैं इस शहर की खास बातें

01. बहुत प्राचीन धार्मिक नगर

उज्जैन को पहले उज्जयिनी कहा जाता था. ये मध्य प्रदेश का प्रमुख और धार्मिक शहर है, जो क्षिप्रा नदी या शिप्रा नदी के किनारे पर बसा है.यह बहुत प्राचीन शहर है. तभी ये शहर महान सम्राट विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी था. उज्जैन को कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है.यहां की भूमि उपजाऊ है. उज्जैन नगर और अंचल की प्रमुख बोली मीठी मालवी है. साथ में हिंदी भी बोली जाती है.

02. यहां 12 साल में लगता है महाकुंभ

उज्जैन में हर 12 साल पर सिंहस्थ महाकुंभ मेला लगता है. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल इस शहर में है. उज्जैन के प्राचीन समय में कई नाम थे-अवन्तिका, उज्जयनी, कनकश्रन्गा आदि. वैसे ये मध्य प्रदेश का पांचवां बड़ा शहर है. अब यहां प्रशासन का पूरा अमला रहता है. देशभर से रेल, सड़क और हवाई यातायात साधनों से ये शहर अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.

03. लंबा इतिहास है शहर का

उज्जैन का इतिहास काफी लंबा रहा है. पुराणों व महाभारत में भी इस शहर का उल्लेख आता है. इस शहर के सबसे प्रसिद्ध शासक गर्दभिल्ल वंश के लोगों ने किया. सम्राट सम्राट विक्रमादित्य इसी वंश से ताल्लुक रखते थे.

महाकवि कालिदास उज्जयिनी के इतिहास प्रसिद्ध सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में थे. फिर यहां अनेक वंशों ने शासन किया. बाद में 1235 में दिल्ली का शमशुद्दीन इल्तमिश ने उज्जैन को न केवल बुरी तरह लूटा बल्कि उसके प्राचीन मंदिरो और पवित्र धार्मिक स्थानों के वैभव को भी खत्म किया.

04. मराठों ने लौटाया शहर का वैभव

सन 1737 में उज्जैन सिंधिया वंश के अधिकार में आया उन्होंने इस शहर का खोया वैभव लौटाया. उसी दौरान महाकालेश्वर मंदिर का फिर से निर्माण हुआ.

05. उज्जैन में बहुत से मंदिर

उज्जैन में आज भी कई धार्मिक पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थान हैं, जिनमें भगवान महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर, चौबीस खंभा देवी, चौसठ योगिनियां, नगर कोट की रानी, हरसिध्दि मां, गढ़कालिका, काल भैरव, विक्रांत भैरव, मंगलनाथ, सिध्दवट, मजार-ए-नज़मी, बिना नींव की मस्जिद, गज लक्ष्मी मंदिर, बृहस्पति मंदिर, नवगृह मंदिर, भूखी माता, भर्तृहरि गुफा, पीरमछन्दर नाथ समाधि, कालिया देह महल, कोठी महल, घंटाघर, जन्तर मंतर , चिंतामन गणेश आदि प्रमुख हैं. आमतौर पर इस शहर की इकोनॉमी पर्यटन पर ज्यादा टिकी रहती है.
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