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ताइवान को मिसाइल बेचने से नाराज हुआ चीन,अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाया

चीन ने मंगलवार को अमेरिका के शीर्ष हथियार निर्माण कंपनी लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की. यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा ताइवान को वायु रक्षा मिसाइल करार को मंजूरी देने के जवाब में उठाया गया है.

  • अमेरिका की दिग्गज हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड मॉर्टिन पर चीन ने प्रतिबंध लगाए 
  • ताइवान को पैट्रियॉट मिसाइल सिस्टम देने पर भड़का चीन, कहा- इससे संबंध बिगड़ेंगे
  • साउथ चाइना सी, हॉन्ग कॉन्ग और ताइवान समेत कई मुद्दों पर अमेरिका और चीन में तल्खी बढ़ी

 

 

बीजिंग: चीन ने मंगलवार को अमेरिका के शीर्ष हथियार निर्माण कंपनी लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की. बीजिंग ने यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ताइवान को पीएसी-3 वायु रक्षा मिसाइल करार को मंजूरी देने के जवाब में उठाया जिसका निर्माण यह कंपनी करती है.

 

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा, ‘‘चीन मजबूती से अमेरिका के ताइवान को हथियार बेचने का विरोध करता है. हम अमेरिका का आह्वान करते हैं कि वह ‘एक चीन’ के सिद्धांत का ईमानदारी से अनुपालन करे. ताइवान को हथियारों की बिक्री बंद करे और ताइवान के साथ सैन्य संबंधों को समाप्त करे. जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और ताइवान जलडमरुमध्य में शांति और सुरक्षा को और नुकसान नहीं पहुंचे.’’

अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा- चीन

 

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) ने जारी बयान में कहा कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) पहले ही संभावित बिक्री को अधिसूचित कर चुकी है.  अमेरिकी मीडिया ने बताया कि ताइवान ने पीएसी-3 मिसाइल रक्षा प्रणाली के कुछ हिस्सों को खरीदने का अनुरोध किया था जिससे यह 30 साल के परिचालन अवधि तक काम कर सके.

 

लॉकहीड मार्टिक कॉरपोरेशन इस करार का प्रमुख ठेकेदार है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध जवाबी कार्रवाई के तहत लगाया है. झाओ ने कहा, ‘‘चीन ने सभी जरूरी कदम उठाने का फैसला किया है. हम इस बिक्री के मुख्य ठेकेदार लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाएंगे.’’

ताइवान में शांति के लिए चीन ने डील रद्द करने की मांग की
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने मंगलवार को पेइचिंग में एक ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिका को ताइवान के साथ अपने सैन्य संबंधों को खत्म करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस डील को रद्द करने से अमेरिका चीन के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचेगा और ताइवान में शांति-स्थिरता बनी रहेगी।

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