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अमेरिकी असॉल्ट राइफलों के बाद अब इजरायल से हेरोन ड्रोन और स्पाइक एंटी-टैंक मिसाइल खरीदेगा भारत, जानें क्यों हैं भारतीय वायुसेना के लिए खास

भारतीय वायुसेना अब दुनिया की लगभग सबसे शक्तिशाली वायुसेना बनने जा रही है. जिस तेज़ी से मोदी सरकार ने भारत की तीनो सेनाओं को हथियारों से सुसज्जित किया है, चीन ही नहीं, चीन जैसे चार देशों का मुकाबला करने में सक्षम हो गया है भारत..

  • तीनों सेनाएं पिछले कुछ सालों से हेरॉन ड्रोन का इस्तेमाल कर रही, यह एक बार में दो दिन तक उड़ सकता है
  • पिछले साल बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद इजरायल से स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की एक खेप भारत को मिली थी
  • डीआरडीओ भी पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेट मिसाइल विकसित कर रहा, इससे 50 हजार मिसाइलों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा

 

नई दिल्ली.   भारत की वायुसेना अपनी मजबूती के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है. अब आ रहे हैं  हेरोन ड्रोन और स्पाइक एंटी-टैंक मिसाइलें जो इज़राइल से खरीद रहा है भारत. ये हथियार बहुत ख़ास हैं भारतीय वायुसेना के लिए और इनके बाद बहुत ख़ास हो जाने वाली है भारतीय वायुसेना भी.

 

लगातार दो दिन उड़ सकते हैं हेरोन 

हेरोन ड्रोन लगातार दो दिन और उससे भी अधिक समय तक उड़ सकते हैं. इतना ही नहीं हेरोन ड्रोनों की एक खासियत और भी है, ये ड्रोन्स दस हज़ार मीटर की ऊंचाई से नीचे की टोह लेने में सक्षम है. चीन ने जो बदतमीजी भारत के साथ  पूर्वी लद्दाख में की है उसकी ध्यान में रखते हुए अब भारत कोई भी खतरा नहीं उठाने वाला और अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कोई कसर भी नहीं छोड़ने वाला

 

एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने के लिए हेरॉन ड्रोन जरूरी

तीनों सेनाएं पहले से ही लद्दाख सेक्टर में सर्विलांस के लिए हेरॉन अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) का इस्तेमाल कर रही है। सरकार से जुड़े एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी  को बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए हेरॉन ड्रोन की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है। खासतौर पर एयरफोर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे खरीदा जाना जरूरी है। हालांकि, इजरायल से कितने हेरॉन ड्रोन खरीदे जाएंगे, इसकी संख्या का पता नहीं चला है। इधर, एयरफोर्स हेरॉन के आर्म्ड वर्जन पर काम कर रही है।

हेरॉन ड्रोन 10 किमी की ऊंचाई से दुश्मन पर नजर रख सकता

तीनों सेनाएं पिछले कुछ सालों से हेरॉन ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। यह एक बार में दो दिन तक उड़ सकता है और 10 किलोमीटर की ऊंचाई से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है।

बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद स्पाइक मिसाइल की पहली खेप आई थी
दूसरी तरफ, सेना भी इजरायल से स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाल खरीदने के बारे में सोच रही। इन मिसाइलों की एक खेप पिछले साल बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद आई थी। पिछले साल सेना को 12 लॉन्चर और 200 स्पाइक मिसाइलें मिलीं थीं। सूत्रों ने बताया कि सेना दुश्मन की आर्म्ड रेजिमेंट के खतरे से निपटने के लिए बड़ी संख्या में स्पाइक मिसाइल लेने की प्लानिंग कर रही है।

डीआरडीओ भी पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल बना रहा
इस बीच, डीआरडीओ भी देसी पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेट मिसाइल विकसित करने का काम कर रहा है। इसके जरिए इंफेंट्री यूनिट्स की ऐसी 50 हजार मिसाइलों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा एलएसी पर हालात बिगड़ने की सूरत में उससे निपटने के लिए सेना की तरफ से पहले ही स्पाइस-2000 बम, असॉल्ट राइफल और मिसाइल खरीदी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

सीमा पर सेना होगी मजबूत 

भारत की सीमा पर निगरानी मजबूत करने और दुस्साहसी शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत की तैयारी पक्की हो रही है. भारत की इसी तैयारी के अंतर्गत भारतीय वायुसेना हेरोन ड्रोन और स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें खरीदने जा रही है. भारत सरकार द्वारा प्रदत्त आपातकालीन वित्तीय शक्तियों के अंतर्गत इज़राइल से यह खरीद की जाने वाली है.

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